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आधुनि‍क रचनाशीलता पर केन्‍दि‍त वि‍शि‍ष्‍ट संचयन
इस अंक में  अंक/19 सम्‍पादकीय

 

 

समाज
लड़की की पुनर्रचना कृष्ण कुमार

शताब्दी
भगवतशरण उपाध्याय अनुसंधाता नहीं व्याख्याता    भगवान सिंह

लेख
अवतारवाद का समाजशास्त्रा और लोकधर्म
  
चौथीराम यादव
प्रेमचंद और राष्टवाद राजकुमार

कहानियां
चोर सिपाही मो आरिफ
लालबहादुर का इंजन राकेश मिश्र
यहां वहां कहां गौरव सोलंकी

विशेष
घर रहेंगे दूधनाथ सिंह

लम्बी कविता
मंच और मचान केदारनाथ सिंह

कविताएं
गिरना नरेश सक्सेना
सात कविताएं गिरिराज किराडू
देश के प्रधानमंत्री के नाम देश के
   एक नागरिक का खत
श्रीप्रकाश शुक्ल
दतर हरे प्रकाश उपाध्याय
तीन कविताएं वसंत त्रिपाठी
 दो कविताएं यू के एस चौहान
 इस कथा में मृत्यु मनोज कुमार झा

डायरी
जिन्दा जुनूनों का कोलाज सुधा अरोड़ा

आत्मकथा
मुर्दहिया : डॉ. तुलसी राम

वृत्तांत
दूसरा शहर और किस्सों की दूसरी किस्त
    राजेश जोशी

लम्बी कहानी
कहानीकार राजू शर्मा

समीक्षाएं
हिन्दी कहानी का रचनात्मक विस्तार
  
मनोज कुमार पांडेय
व्यापक होती चिन्ताएं अरुणेश शुक्ल
निहितार्थों की समझ शिव कुमार मिश्र
 समय स्वप्न और प्रतिरोध राजीव कुमार


अंक/19   जनवरी /09
सम्‍पादक : अखि‍लेश


विशेष अंक
अंक 16 अंक 17 अंक 18

सम्पर्क
18/201, इन्दिरा नगर,
लखनऊ - 226016 उत्तर प्रदेश
दूरभाष : 0522-2345301
ई-मेल akhilesh_tadbhav@yahoo.com

मूल्य

एक प्रति 50 रुपये
सदस्यता (बार्षिक ) चार अंक : 190 रुपये
संस्थाओं के लिए 250 रूपये
विदेश के लिए चालीस डालर
आजीवन सदस्यता 1500 रूपये

 

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अंक/19   जनवरी 2009

यहां वहां कहां

गौरव सोलंकी

बूढे+ ने शीशम के पेड़ के सहारे ब्लैकबॉर्ड टिकाया और जेब में से मोटे कांच वाली ऐनक निकाल कर आंखों पर चढ़ा ली।
द्र अ से...?
बूढ़े ने तीन का अंक बनाया, उसके बीच से एक लेटा हुआ डंडा खींचा और उसके दूसरी ओर एक खड़ा डंडा खींचा। फिर सामने टाटपट्टी बिछा कर बैठे बच्चों की ओर देखने लगा।
द्र अर्जुन...
एक बच्चा बोला।
द्र अकबर...
दूसरा बोला।
द्र अरहर की दाल।
एक और बोला।
द्र अनार...
बूढ़े ने कहा और घबरा कर मुंह फेर लिया। फिर उसने ÷आ' लिखा।
द्र आ से?
द्र आग...
पहला बच्चा बोला।
द्र आग..., द्र आग..., द्र आग...
तीन और बच्चों ने भी पुष्टि की।
तभी कहीं से एक जवान लड़का आ गया।
द्र खाना खा लो।
बूढ़े ने बच्चों से पूछाद्र खाना खाओगे?
द्र नहीं...
द्र नहीं...
द्र नहीं...
द्र मां ने मना किया है।
बूढ़ा डर गया। कुछ दिनों से वह छोटी छोटी बिना बात की बातों पर डरने लगा था। उसने घबरा कर ऐनक उतार ली।
द्र बच्चो, आज का अंतिम प्रश्न। हमारा देश कौन सा है?
बच्चे चुप रहे।
द्र बूढे+ का देश कौन सा है?
एक बच्चे ने अपने पास बैठे बच्चे के कान में पूछा।
द्र बच्चो, कल ही मैंने बताया था। कौन सा है हमारा देश?
बच्चे चुप रहे।
द्र ठंडा हो जायेगा...
जवान लड़के ने कहा तो बूढ़ा निराश होकर चलने लगा। बच्चे अपनी टाटपट्टियां उठा कर भाग लिये।
द्र बूढ़े का देश कौन सा है?
तीसरे बच्चे ने अपना सामान समेटते हुए चौथे बच्चे के कान में पूछा।
द्र कोई दूसरा है...
चौथे बच्चे ने उनर दिया।
द्र कोई दूसरा है..., द्र कोई दूसरा है...
सब बच्चे भागते हुए अपने अपने कानों में फुसफुसा रहे थे।

बुढ़िया ने लकड़ी की थाली में खाना परोस कर उसके सामने रख दिया।
द्र ठंडा हो गया है।
बूढ़े ने कहा। वह आयी और थाली उठा कर ले गयी।
द्र दे दो। खा लूंगा ऐसे ही।
कुछ देर बाद भूखे बूढ़े ने कहा तो वह वही थाली रख गयी।
द्र तुम आजकल झुंझलायी हुई क्यों रहती हो?
बुढ़िया मशीन जैसी लगती थी। उसके हाथ पैर भी यंत्रा की तरह काम करते हुए लगते थे। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं आता था। बूढ़े को लगता था कि उसके मन में भी कोई भाव नहीं आता।
द्र मुझे अच्छा नहीं लगता...
द्र क्या?
द्र यहां की औरतों के बाल सफेद नहीं होते। मेरे हो गये हैं।
द्र अच्छा क्यों नहीं लगता?
द्र सब पड़ोसिनें मुझे अलग मानती हैं।
द्र इस उम्र में यहां के सब मदोर्ं की कमर झुक जाती है। मेरी नहीं झुकी...मुझे भी अच्छा नहीं लगता।
द्र तुम भी कमर झुका कर चला करो।
बुढ़ि+या ने दो रोटियां लकड़ी की थाली में रख दीं।
द्र तुम भी कोयले के पानी में बाल धोया करो।
द्र उससे बाल काले हो जाते हैं?
द्र पता नहीं। क्या पता, हो जाते हों...
फिर चुप्पी रही। बूढ़े ने इधर उधर देखा। लड़के को घर में न पाकर उसने पूछाद्र यह लड़का कहां रहता है दिन भर?
द्र दरवाजे पर खड़ा रहता है...
द्र कल दोपहर में छत पर क्या कर रहा था?
द्र एक लड़की है पड़ोस में...
द्र उसकी मां के बाल कैसे हैं?
द्र काले।
द्र लड़की के?
द्र भूरे।
बूढ़े के दिल को हल्का सा सुकून मिला। लेकिन अगले ही क्षण उसके चेहरे पर फिर घबराहट आ गयी।
द्र उसका बाप तो झुक कर चलता होगा...
वह बड़बड़ाया।
द्र सुनो...
फिर थाली में हाथ धोते हुए धीरे से बोला, ताकि बुढ़िया के सिवा कोई और न सुन ले।
द्र क्या?
द्र आज के बाद यह मूंग की दाल मत बनाना।
द्र क्यों?
द्र यहां सब अरहर की दाल ही खाते हैं।
द्र ठीक है।

दोपहर हो गयी थी। लड़का लड़की के साथ पेड़ की डाली पर बैठा था। लड़की कोई गीत गुनगुना रही थी।
द्र इसका अर्थ क्या है?
लड़के ने पूछा।
द्र तुम्हें नहीं पता?
द्र नहीं, मैंने पहली बार सुना है।
द्र तुम हमारे वाले गाने नहीं सुनते। तुम्हारे यहां दूसरी तरह के गाने बजते रहते हैं।
द्र दूसरी तरह के कैसे?
द्र मुझे समझ में नहीं आते।
द्र मुझे भी तुम्हारे गीत समझ में नहीं आते...
उसके बाद लड़की ने गुनगुनाना बंद कर दिया। वह हल्की सी उदास हो गयी थी। वह हाथ बढ़ा कर उ+पर की डाल की पनियां तोड़ने लगी।
कुछ देर बाद वह बोलीद्र तुम्हारी मां कभी कभी कोई और भाषा बोलने लगती है।
द्र कौन सी?
द्र मुझे क्या पता...
द्र मुझे तो नहीं लगता।
द्र तुम्हें समझ में आती होगी, इसलिए पता नहीं चलता होगा कि कब दूसरी भाषा बोलने लगी है।
द्र यह भी हो सकता है...
लड़का धीरे से बोला और वह भी उदास होकर पनियां तोड़ने लगा।
द्र मैं तो तुम्हारी भाषा ही बोलता हूं।
द्र अपनी मां के साथ तो दूसरी बोलते हो।
द्र अच्छा?
द्र तुम्हें नहीं पता?
द्र नहीं। मुझे पता नहीं चलता होगा कि कब दूसरी बोलने लगा हूं।
द्र मुझे अच्छी नहीं लगती...
द्र मेरी मां?
द्र तुम्हारी भाषा...
द्र अब से नहीं बोलूंगा।
लड़का यह वचन देने के बाद और उदास हो गया। उसके चेहरे को देख कर लड़की भी चिन्तित लगने लगी थी।
द्र तुम्हारा घर कहां है?
वह कुछ देर बाद बोली।
द्र सामने...तुम्हारे घर के साथ वाला ही तो है।
वह इस व्यर्थ के प्र्रश्न पर झुंझला गया।
द्र नहीं, जहां से तुम लोग आये हो।
द्र मैं तो यहीं से आया हूं। जन्म के बाद कहीं भी नहीं गया।
द्र पिता जी कहते हैं कि तुम कहीं और से आये हो।
लड़की धीरे से बोली। वह अपने अंगूठे से पेड़ की छ ाल कुरेदने लगी थी।
द्र बाबा आये थे बहुत साल पहले।
द्र तुम पिता जी कहा करो। यहां कोई बाबा नहीं कहता।
लड़का चुप रहा।
द्र क्या हुआ?
द्र कुछ नहीं।
द्र तुम्हें बुरा लगा?
द्र नहीं, मुझे बुरा नहीं लगता।
द्र देखो, अब रोने मत लगना।
द्र नहीं...
द्र हमारे यहां लड़के नहीं रोते।
द्र हमारे यहां भी...
द्र तुम्हारा यहां कहां है?
वह फिर अपने प्रश्न पर आ गयी थी।
द्र पता नहीं...
द्र तुम शादी के बाद सिर पर पगड़ी रखा करोगे?
द्र यहां रखते हैं?
द्र हां...
द्र मैं भी रख लूंगा।
लड़की के चेहरे पर मुस्कान के रंग की एक रेखा खिंच आयीं।
द्र लेकिन तुम झुक कर नहीं चलोगे?
द्र पता नहीं...
द्र तुम्हारे पिता जी तो नहीं चलते।
द्र मेरी मां जल्दी ही बाल रंग लेगी।
द्र कोयले से?
द्र तुम्हें कैसे पता??
द्र उधर एक और मास्टर रहता था। उसकी घरवाली भी कोयले से रंगती थी।
द्र वह कहां का था?
द्र यहां का नहीं था।
द्र यह यहां कहां तक है?
द्र मालूम नहीं।
दोपहर धीरे धीरे खत्म हो गयी। पेड़ भी बुझ गया।

लड़की पहले उठ कर चली गयी थी। लड़के ने मिट्टी के ढेलों को कुचलते हुए उसका जाना देखा। लड़के ने उसका मुड़ कर देखना भी देखा, जो नहीं हुआ। लड़की ने एक दुकान पर टंगा हुआ पगड़ी वाला लाल कपड़ा देखा और वह मुस्कुरायी।
पास के मैदान में लड़के खो खो खेल रहे थे। लड़का पेड़ से कूद कर उतरा और उनके पास चला गया। उसने कतार में बैठे पहले लड़के से कहाद्र मैं भी खेलना चाहता हूं।
द्र लेकिन तुम्हें हमेशा भागने वाली तरफ होना पड़ेगा।
द्र ठीक है। मैं तैयार हूं।
पहले लड़के ने भागने वाली टोली से पेड़ के नीचे बैठ जाने को कहा। भागने वाले लड़के पेड़ के नीचे बैठ गये। कुछ लड़के ताश खेलने लगे, हालांकि वे उसी समय खो खो भी खेल रहे थे। कुछ लड़के लेट कर सो गये। उन्हें सोते हुए खो खो खेलना था।
लड़का बैठी हुई कतार के चक्कर काटता हुआ भागता रहा। जब वह नौ बार पकड़ा गया तो एक पक्ष का खेल खत्म हो गया। उसके कपड़े पसीने से तर हो रहे थे। उसने कहा कि अब वह बैठना या सोना या चले जाना चाहता है। सब लड़कों ने एक स्वर में कहा कि यह खेल के नियमों के विरुद्ध होगा। उसे दूसरी पारी भी पूरी करनी होगी।
दूसरी पारी में लड़का रुक रुक कर हांफता रहा। जब वह फिर से नौ बार पकड़ा गया तो उसे जाने दिया गया। उसने जाने से पहले सबसे हाथ मिलाया और धन्यवाद कहा।
द्र तुम ऐसा मत समझना कि तुम्हें ही ज्यादा भागना पड़ा है। जो पहली बार आता है, हमारे यहां उसके लिए यही नियम है।
पहले लड़के ने पीछे से पुकार कर उससे कहा तो वह कृतज्ञता से मुस्कुरा दिया। सब लड़के देर तक किसी बात पर मुस्कुराते रहे।
रास्ते में एक कमरे के बाहर बहुत भीड़ थी।
लड़के ने एक आदमी से पूछाद्र यहां क्या हो रहा है?
द्र यहां पहचानपत्रा बनाये जा रहे हैं।
द्र मैंने भी पिछली बार फोटो खिंचवायी थी, लेकिन मेरा पहचानपत्रा मुझे अब तक नहीं मिला।
द्र तुम प्रश्न पूछ रहे हो?
द्र हां।
द्र मैं भीड़ हूं। भीड़ उनर नहीं देती। ऐसा संविधान में लिखा है।
द्र उनर कौन देगा?
द्र जो मेज के उस तरफ बैठा है, वह उनर देने के लिए नियुक्त किया गया है। उसका मन होगा तो वह उनर देगा।
लड़का मेज की ओर बढ़ा लेकिन भीड़ ने उसे छिटक कर बाहर फेंक दिया। वह दूसरी तरफ से घुस कर किसी तरह मेज तक पहुंचा।
द्र मेरा पहचानपत्रा छः महीने से नहीं बना।
द्र तस्वीर में तुम्हारी आंखें बंद आयी थीं।
द्र नहीं, मुझे याद है कि मैंने फोटो खिंचने के आधे घंटे बाद तक भी पलक नहीं झपकायी थी।
द्र तुमने अपने हस्ताक्षर गलत किये थे।
द्र हस्ताक्षर कोई गणित के सवाल थोड़े ही हैं कि सही या गलत हों।
द्र एक व्यक्ति के दो जगह से पहचानपत्रा नहीं बन सकते।
द्र लेकिन मेरा तो एक ही जगह से है।
द्र फिर वह एक जगह यह नहीं हो सकती।
द्र क्यों?
द्र यह बताने का मेरा मन नहीं है।
द्र कहां बनेगा?
द्र यहां नहीं।
भीड़ उसे धकेलते हुए चिल्ला कर बोलीद्र कह दिया न, यहां नहीं। कह दिया न, यहां नहीं।
उसने कमरे की ओर देखा। उ+पर लाल रंग का एक बड़ा सा बोर्ड भी लगा थाद्र यहां नहीं।
उनके घर एक मूछों वाला काला आदमी आया हुआ था। लड़का घर लौटा तो बुढ़िया ने बताया कि यह बूढ़े का बचपन का दोस्त है। बुढ़िया ने कहा कि लड़के को उसके पैर छूने चाहिए। लड़के ने कहा कि वह सोना चाहता है। बुढ़िया लौकी काटने लगी। लड़का अंदर वाली कोठरी में लेट गया। उसे नींद नहीं आ रही थी। उसे बैठक की बातें सुनायी पड़ती रहीं। बुढ़िया बीच बीच में खांस रही थी। लड़के ने एक बार भीतर से चिल्ला कर उसे धीरे खांसने के लिए कहा। बुढ़िया ने कहा कि छौंक लग जायेगा तो उसकी खांसी रुक जायेगी। कुछ देर तक करवटें बदलते रहने के बाद लड़का उठ कर बैठक में चला गया। उसने मूछों वाले आदमी को हाथ जोड़ कर नमस्ते किया। मूछों वाले आदमी ने खड़े होकर उसके सिर पर हाथ फेरा। ऐसा करते हुए वह इस तरह झुक गया जैसे लड़का झुक कर उसके पैर छू रहा हो और उसे भी आशीर्वाद देने के लिए झुकना पड़ा हो। मूछों वाला आदमी बूढ़े को बता रहा था कि उसने सुना है कि यहां सस्ती कीमत में अच्छी गायें मिल जाती हैं और वह यहां से गायें खरीद कर गांव में ले जाकर बेच देगा।
लड़के ने पूछाद्र कौन से गांव में?
द्र हमारे ही गांव में।
जवाब बूढ़े ने दिया। लड़के ने देखा कि आज बूढ़े की आंखें चमक रही हैं जैसे उसने खोया हुआ खजाना पा लिया हो। लड़का चुप रहा।
बूढ़े ने मूछों वाले से पूछा द्र तुम्हें कैसे पता चलेगा कि किसकी गाय बिकाउ+ है?
द्र मैं ÷गाय बेच लो... गाय बेच लो' बोलता हुआ गली गली घूमूंगा।
लड़के ने कहा द्र ÷गाय बेच लो' की बजाय ÷गाय बेच दो' बोला जाना चाहिए।
नहीं, ÷गाय बेच लो' सुनना किसी सुनहरे अवसर की तरह लगता है, जैसे बदले में कुछ बड़ा मिलने वाला हो।
उसने लड़के से आंखें बंद करके अपनी बोली सुनने के लिए कहा। उसने ÷गाय बेच लो' को दो तीन बार बोला। फिर लड़के ने आंखें खोल कर सिर हिला कर उसकी बात की पुष्टि की।
मूछों वाला आदमी कुछ देर बाद लड़के से बोला कि उसे अब पढ़ाई छोड़ देनी चाहिए।
द्र क्यों?
हमारी तरफ के सब लड़के आजकल राजमिस्त्राी का काम सीख रहे हैं।
द्र क्यों?
द्र यहां बहुत मकान बन रहे हैं और यहां के लोगों से यह काम नहीं होता।
द्र तो वे सब लड़के यहां आकर मकान बनायेंगे?
द्र हां। आजकल यहां से वहां पैसे भेजना भी बहुत आसान हो गया है।
द्र कहां ?
द्र कहीं भी भेजना आसान हो गया है वैसे।
द्र वहां मकान नहीं बनते?
द्र बनते हैं पर यहां ज्यादा पैसे मिलते हैं।
अबकी बार बूढ़ा बोला। लड़का कुछ देर सोचता रहा। फिर बूढे+ ने उसे खाना लाने के लिए कहा। लड़का चलने लगा तो मूंछों वाले आदमी ने उसे एक थैला दे दिया।
द्र गांव से गुड़ लाया हूं।
गुड़ीली मुस्कान से बूढ़े का चेहरा गुड़िया सा चंचल हो उठा।

अगली सुबह मूंछों वाला आदमी दो गायें खरीद कर चला गया। शाम को बूढ़ा देर से घर लौटा।
द्र कहां रह गये थे?
बुढ़िया ने उसी यंत्रावत ढंग से पूछा।
द्र मां, तुम यह भाषा मत बोला करो।
लड़के ने बीच में ही टोक दिया।
द्र क्यों?
द्र यहां कोई नहीं बोलता।
बुढ़िया चुप रही। बूढ़ा आकर खाट पर बैठ गया। वह झुक कर चल रहा था।
बुढ़िया ने ही उसे झुक कर चलने की सलाह दी थी, लेकिन उसे झुक कर चलते देख वह चौंक कर बोली द्र क्या हुआ तुम्हें?
द्र उन्होंने कहा है कि झुक कर चला करूं।
द्र किन्होंने?
द्र यहीं के कुछ लोग थे। चेहरे से पहचानता हूं, नाम से नहीं।
द्र उनके हाथ में क्या था?
लड़के ने व्यग्र होकर पूछा।
द्र कुछ नहीं...
द्र कुछ और भी कहा?
बुढ़िया अब वहीं की भाषा बोल रही थी।
द्र कहा कि अबकी बार कोई गाय खरीदने आया तो बहुत बुरा होगा।
द्र कुछ बुरी बात भी कही?
द्र नहीं, कमर को मोड़ने में मदद की। यहां के लोग बहुत अच्छे हैं।
द्र हां, यहां के लोग बहुत अच्छे हैं।
लड़के ने भी सहमति जतायी।
द्र तुम्हें दर्द हो रहा होगा?
बुढ़िया ने पूछा। बूढ़े को पहली बार लगा कि बुढ़िया के मन में भी भावनाएं उपज सकती हैं। इस अनुभूति से ही वह घबरा गया और उसने इनकार में गर्दन हिला दी।
बूढ़ा खाट पर लेट गया। लड़का उठ कर बाहर को चलने लगा तो बूढ़े ने टोक दिया।
द्र कहां जा रहा है?
द्र पेड़ पर।
द्र वहां तो अंधेरा होगा।
द्र वह दिया लेकर आती है।
द्र उसके बाल किस रंग के हैं?
द्र पहले भूरे थे...अब काले होने लगे हैं।
द्र मुझे डर लगता है...
बुढ़िया बोली।
द्र वहां कोई नहीं आता मां।
द्र यहां के पेड़ों पर सांप रहते हैं। हमारे यहां की बात कुछ और थी।
द्र हमारा यहां कहां है मां?
द्र अपने बाबा से पूछ।
लड़के ने बूढ़े की ओर देखा। वह आंखें बंद करके सोने का दिखावा कर रहा था। लड़का बिना पूछे ही चला गया।

द्र आज हमारा त्योहार है।
लड़की कई दिये लकर आयी थी।
द्र पिछले साल भी तो आया था।
द्र हां, लेकिन तब हम पेड़ पर नहीं मिलते थे।
द्र तब यह पेड़ छोटा था।
द्र तुम लोगों ने पिछली बार भी नहीं मनाया था।
द्र क्या?
द्र हमारा त्योहार...तुम घर में अंधेरा करके जल्दी सो गये थे।
द्र तुम्हें किसने बताया?
द्र अगले दिन सब कह रहे थे।
द्र हां, हम जल्दी सो जाते हैं।
द्र लेकिन यह त्योहार का अपमान है।
द्र त्योहार तो तुम्हारा है...
द्र हां...यहां का...
द्र तुम भी तो हमारे त्योहार के दिन व्रत नहीं रखती।
द्र यहां कोई नहीं रखता।
द्र वह भी तो अपमान है...
द्र नहीं है।
कुछ देर बाद लड़की ने पूछा द्र तुम भी मकान तो नहीं चिनने लगोगे?
द्र चिनते कैसे हैं?
द्र हम मकान बनाने को चिनना कहते हैं।
द्र मुझे थोड़े ही कहीं पैसे भेजने हैं।
द्र कहीं कहां?
द्र यही तो कह रहा हूं कि कहीं कहीं नहीं है।
द्र तुम्हारे यहां के सब लड़के यही करते हैं, इसलिए मुझे डर लगता है।
कह कर लड़की चुप हो गयी। उसके घर में खुशी का वातावरण था। वह खुश होकर ही पेड़ पर आयी थी, लेकिन वहां उसका मन भारी होने लगा था। वह उठ कर चलने लगी।
द्र तुम जल्दी जा रही हो?
द्र आज हम सब घर के सामने देर तक नाचेंगे।
द्र मैं भी चलूं?
द्र नही, तुम्हें उस तरह नाचना नहीं आता।
द्र मैं सीख लूंगा।
द्र मत चलो...
लड़की उसके इस प्रस्ताव पर सकपका गयी थी।
द्र ठीक है, मैं अपने घर जाकर सो जाता हूं।
द्र अंधेरा मत करना।
द्र हमारे घर में चांदनी नहीं पड़ती।
द्र ये दिये ले जाओ। दीवार पर रख देना।
लड़की ने दियों की थाली लड़के को पकड़ा दी। वह चलने लगी।
द्र यहां के पेड़ों पर सांप रहते हैं?
द्र हम उनकी पूजा करते हैं?
लड़का भी चल दिया। वे साथ चलते रहे।
द्र कल दोपहर को मिलते हैं।
द्र नहीं, कल मत आना।
द्र क्यों?
द्र मुझे डर लग रहा है?
द्र सांपों से?
द्र मालूम नहीं किससे, पर लग रहा है।
द्र ठीक है, नहीं आउ+ंगा।
द्र आज तुम्हारे पिता जी झुक कर चल रहे थे।
लड़की खुश थी।
द्र मां ने कोयला भिगो दिया है। अब सुबह रंगेगी।
द्र तुम बहुत अच्छे हो...
द्र तुम भी। यहां के सब लोग बहुत अच्छे हैं।
लड़की मुस्कुराती हुई अपने घर में चली गयी। लड़के ने अपने दरवाजे में घुसते हुए फूंक मार कर दिये बुझा दिये। बूढ़ा बुढ़िया सो चुके थे।
मोहल्ले वाले नाचते रहे। उनके घर में रात भर अंधेरा रहा।
द्र बूढ़े को बाहर भेजो।
बुढ़िया कोयले के पानी में बाल भिगो कर बैठी ही थी कि दरवाजे पर शोर सा हुआ। वह बाहर गयी तो बाहर खड़े लोगों ने बूढ़े को भेजने के लिए कहा। बुढ़िया ने उसे भेज दिया और खुद दरवाजे की झिर्रियों में से झांक कर देखने लगी।
द्र तूने रात भर घर में अंधेरा क्यों रखा?
द्र पास वालों ने दुमंजिले पर कमरा बनवा लिया है, इसलिए हमारे आंगन में चांदनी नहीं पड़ती।
द्र दिये जलाने थे। दूसरे ने कहा। इस पर बूढ़ा चुप रहा।
द्र बूढ़े का घर जला दो, फिर अंधेरा नहीं होगा।
उन लोगों के साथ खड़े एक बच्चे ने कहा। बूढ़ा पढ़ाता था तो वह सबसे अगली पंक्ति में बैठता था।
तभी लड़का भी बाहर आ गया। उसे देख कर बच्चे ने इशारा कियाद्र यही है।
द्र तू पेड़ पर लड़की के साथ बैठता है?
द्र हां।
द्र वह मेरी बेटी है। अब से उसे देखना भी मत...
द्र हम शादी करेंगे।
द्र बूढ़े का घर जला दो। इसने त्योहार का अपमान किया है।
बच्चा फिर से अपने पिता का हाथ खींच खींच कर कहने लगा।
द्र अपने लड़के को समझा ले। यहां की किसी लड़की को देखा तो तुममें से कोई नहीं दिखेगा।
द्र मैं भी यहां का हूं। सिर पर पगड़ी भी रखूंगा।
लड़का बोला तो सब हंसने लगे। बच्चा भी हंसा।
द्र बूढ़े से पूछ कि तू कहां का है?
बच्चे के पिता ने लड़के की गर्दन पकड़ कर बूढ़े की ओर घुमा दी।
द्र पिता जी, हम कहां के हैं?
लड़के ने ÷पिता जी' शब्द पर अधिक जोर दिया। बूढ़ा चुप रहा। बुढ़िया भी दरवाजे की आड़ से निकल कर बाहर आ गयी।
द्र बूढ़े का घर...
बच्चा फिर से कहने लगा तो बूढ़ा उसके पैरों पर गिर पड़ा।
द्र मुझे माफ कर दीजिये...
बच्चा बहुत खुश हुआ। उसने बूढ़े के सिर पर पैर धर दिया और जोर जोर से हंसने लगा।
लड़के ने झुक कर बूढ़े को उठा लिया। अब सब हंसने लगे, लेकिन इससे बच्चा नाराज हो गया। फिर से अपने पिता का हाथ खींच खींच कर कहने लगाद्र बूढ़े का घर जला दो। इसका लड़का यहां की लड़की को पेड़ पर ले जाता है। ये सब त्योहार का अपमान करते हैं।
बच्चे के धाराप्रवाह बोलने पर वहां उपस्थित सब लोग फिर जोर से हंसे। बूढ़ा, बुढ़िया और लड़का सिर झुका कर खड़े रहे।
बच्चा फिर बोल पड़ा द्र बूढ़े का घर...
अब एक कनस्तर लिये हुए भीड़ में से एक नवयुवक घर के अंदर गया और तेल छिड़क कर आग लगा दी।
बच्चा ताली पीटने


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