यूं मैंने झूठ कहना शुरू किया
यूं मैंने झूठ कहना शुरू किया
दिसम्बर की एक सुबह
तुमने कोहरे में आकाश की ओर उछाल भरी
और मेरे सितारे गर्दिश में आने की शुरुआत हुई
क्कउसी दिन बहुत देर तक फायरिंग की आवाज की तरह सुनायी दी थी संसार की
आवाज मैं छत पर ऐसे बैठा था जैसे तहखाने में फंसे फंसे कई बैठे होंत्र्
कोहरे में छलावे सी उस उछाल में
तुम्हारे हाथ किसी और के हो गये
पांव इतने उं+चे खो गये कि तीन साल बाद मेरी छाती पर गिरे
चेहरा एक लपट जिसमें उसी के नक्श भस्म हो गये
और शरीर कोई हिरण जिसके पीछे भटकते
मैं कुंए में कूद कर प्यासा मरा
क्कउसी दिन गिनने की कोशिश की थी
एक दिन में कितने विमान गुजरते हैं घर के उ+पर सेत्र्
तो दिसम्बर की उस सुबह
तुमने कोहरे में ऐसे छलांग भरी मानो
पृथ्वी पर रहते हुए उ+ब गयी हो
क्कउसी शाम फटा था एक बम जिसके छर्रे अशोक भाई को न लगे होते तो भी वे
फोन पर उतना ही फूट फूट कर रोये होते उन्हें यकीन था किसी विमान से गिरा
था वो कोई रख कर नहीं गया था उसेत्र्
यूं मैंने झूठ कहना शुरू किया
सब कुछ होना...रहेगा
छत पर अनिष्ट टहल रहा हैद्र ढीठ, बेशर्म
कमरे में मुझे करना है अपना शल्य
इस मुहूर्त के तीखे चाकू से
मुझ पर नजर रखने वाले कातिल तैनात हैं
इन दिनों
किसी और के यहां
अंतरिक्ष के फर्श पर बदहवास भागती रहती है फोन की आवाज
मेरे कपड़ों ने यूं पहना है मुझे कि अब कोई और हूं मैं
घर से बाहर निकलते हुए
कई सालों बाद एक उचक्का सा डॉक्टर पढ़ रहा है
सब कुछ के पंचनामे की खौफनाक, मनोरंजक रपट
मुझे यहांद्रइस कविता मेंद्र÷बचाना' शब्द लिखने से बचना है
सुंदर भी वैसे ही नष्ट करता है
शिराओं पे तीखी धार जगाती है खून में उन्माद आंखें मूंदता हूं
और अब यह मेरे मरने के बाद की पृथ्वी है
उतनी ही सुंदर उतनी ही असुंदर
यह मेरे न रहने के बाद होती हुई बारिश है
उतना ही खिलाती हुई उतना ही ढहाती हुई
यह मेरे न रहने के बाद मरती हुई दुनिया है
उतनी ही सम्मोहक उतनी ही अवसन्न
खून धार से मिलने को ऐसे उद्धत जैसे मैं तुमसे
आंखें खोलता हूं पर वे नहीं खुलतीं
सुंदर भी वैसे ही नष्ट करता है जैसे कि वह जो नहीं है सुंदर
कोलम्बस
क्कबाबला के लिएत्र्
अगर ऐसा हुआ होता कि किसी और के साथ बिताना होता यह जीवन जैसा कि तकरीबन हो ही गया था तो कैसा होता वह जीवन उसकी कल्पना कर पाना अब तुमसे इतना घिरा होकर नामुमकिन सा है हो सकता है तब मैं वह जीवन जीते हुए जो अभी है उसकी कल्पना भी इसी तरह नहीं कर पाती जो है उसे हमेशा जो नहीं है से बदतर या बेहतर समझने की आसान कैफियत के अलावा भी कोई चीज है तुम्हारे गुजारिश में फैले हाथों के संदेसे की तरह जिसे कितना साफ पढ़ लिया था मैंने उस अनजान उजाड़ पार्क में अगर वैसा ही हुआ होता जीवन जैसा कि तकरीबन हो ही गया था तो यह बच्चा तो किसी को नहीं दिखायी दिया होता जो मैं हूं मिष्टू तू मेरा कोलम्बस है
सोने से पहले अंधेरे में बातें कर रहे थे हम कुछ चकित कुछ नम मैं सुन रहा था कि जैसे ही उसने कहा कोलम्बस मुझे दिखायी दिया गफलत में कुछ और खोज लेने वाले एक जहाजी लुटेरे का चेहरा एक काला जहाज जैसा कुछ फिल्मों में देखा है और लुटेरे के चेहरे पर सख्त परदेसी बेचैनी
अपनी कल्पना की सिहरन में मैंने अंधेरे में देखा उसका दीदा-ए-तर और मेरे पेट को टटोलता उसका हाथ बचपन से ऐसे ही पेट पकड़ कर सोती आयी है वह कोलम्बस वह नहीं था जो मैंने देखा कोलम्बस तो अट्ठाईस बरस की एक लड़की में उस बच्चे को खोज लेने वाला था जो कि वह थी
मुझे अपनी कल्पना का कुछ करना पड़ेगा
लिखने वाले की गलती से
जीवन को जिस कहानी की तरह सुनाया गया है उसमें दुख के दो उभार हैं जो उस कहानी को लिखना शुरू करते ही कहीं और खिसक जाते हैं जैसे रेतघड़ी में बंद रेत की छोटी सी ढेरी दूसरे हिस्से को इस तरह भरने लगे कि जो छोटी सी ढेरी रात थी वही अब सुबह की तरह बिखरी है और जो कण नींद लेने के समय से गिरती बूंद था वही अब जागने के समय से उलझती वह नदी है जिसके किनारे होना चाहिए था वह घर जो अब लिखने वाले की गलती से गंगा किनारे है जहां लहरों ने तट पर ला पटका है तुम्हारा शव और तुम्हें यह गवाही देनी है कि तुम अपने शव को नहीं पहचानते
तैयारी
आसमान ने पूरी कर ली थी
बरसने की तैयारी
धरती ने पूरा खिलने की
देह ने पूरी कर ली थी
तैयारी उड़ने की
आत्मा ने मुक्ति की पूरी
तभी गोली लगी आंख में
जिसमें नहीं थी पूरी
उजड़ने की तैयारी
पैर छूना
हर बात झूठ लग रही थी अपने रेगिस्तानी शहर से डेढ़ दो हजार किलोमीटर सुदूर दक्षिण में उसी शाम उसे देखने एक लड़का एक होटेल में आयेगा मां बाप ने तय किया है फोन पर बात भी करायी गयी सब फर्जी मेरा दिमाग तो एक टूर इंचार्ज अध्यापक की तरह काम कर ही रहा था मेरी क्लास में छह महीने का बहीखाता भी हक में नहीं था उसके कि तभी अचानक एक उपन्यासकार जैसा जोखिम उठाते हुए कहा जाओ दो घंटे में लौट आना वर्ना अध्यापक ने फर्ज अदायगी की वह अपने कमरे में गयी थैंक्स बोलते हुए मैं उपन्यासकार से झगड़ता हुआ वहीं खड़ा रह गया दसेक मिनट में वह कमरे से निकली तैयार जींस छोटा सा टॉप अभिसारिका मेरा नायिकाभेद बोला बेहद अटपटेपन से उसे देख रहा था कि वह पास आयी और सीधे मेरे पैर छू लिये बिना किसी नाटक के फिर से थैंक्स और चली गयी
अपने को सबसे बेहतर समझने वाला उसका उद्दंड आत्मविश्वास छह महीने में कई बार टकरा चुका था मुझसे पैर छूना मास्टरस्टᆭोक नहीं था यह तब जितना साफ था मेरे लिए आज भी उतना ही साफ है समय से कुछ पहले ही लौट आयी मैंने वह कॉलेज छोड़ दिया उसके अगले साल सितम्बर को एक एसएमएस आया आपके फैसले हमेशा याद रहेंगे मुझे
दूसरी बार और भी अजब हुआ दूर की एक हमउम्र रिश्तेदार सिर्फ दूसरी बार मिल रहा था जाते जाते पैर छू लिए कुछ बहुत बड़ा फैसला लेना है मन पक्का कर लिया है आपका आशीर्वाद चाहिए उसके चार दिन बाद उसने भाग कर अपने चचेरे भाई से शादी कर ली
आज तक समझ नहीं पाया दोनों बार ऐसा क्यूं हुआ क्यूं इन दो लड़कियों ने छुए मेरे पैर क्यूं पूरे नहीं हो सकते थे उनके काम मेरे आशीर्वाद के बिना इसका कहीं इस बात से तो कुछ लेनादेना नहीं कि बहुत कायदे से न सही पर दोनों को पता था कुछ राइटर वगैरह हूं